सरस्वती स्तोत्र

या कुंदेंदुतुषार हार धवला या शुभ्र वस्त्रा वृता ॥ या वीणा वरदंड मंडितकरा या श्वेत पद्मासना ||

सरस्वती स्तोत्र

या कुंदेंदुतुषार हार धवला या शुभ्र वस्त्रा वृता ॥ 
या वीणा वरदंड मंडितकरा या श्वेत पद्मासना || 
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वंदिता ॥ 
सामां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥ १ ॥ 
प्रथमं भारती नाम द्वितीयंत्र सरस्वती ॥ 
तृतीयं शारदादेवी चतुर्थ हंसगामिनी ॥ १ ॥ 
पंचमं विदुवामाता षष्टं वागेश्वरी तथा ॥ 
कौमारी सप्तमं प्रोक्त मष्टमं ब्रह्मचारिणी ॥२॥ 
नवमं त्रिपुरा देवि दशमं ज्ञान धारिणी ॥ 
एकादशंतु ब्रह्माणो द्वादशं ब्रह्मवादिनी ॥३॥
वाणी त्रयोदशं नाम भाषा चैव चतुर्दशं ॥ 
पंचदशं श्रुतंदेवि षोडशं गीर्निगद्यते ॥४॥ 
एतानि शुद्ध नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत् ॥ 
तस्य संतुष्य ते देवि शारदा वरदायिनी ॥५॥